धान में झोंका (ब्लास्ट) रोग: पत्ती और गर्दन झोंका के लक्षण और रोकथाम

· लेखक: AgriVruddhi

Neck blast in paddy: rice panicle bent over with a dark brown rotted neck, marked by a red arrow

ऊपर की फोटो: धान के खेत में गर्दन झोंका। तीर बाली के नीचे सड़ी हुई गर्दन की ओर इशारा करता है, फोटो: Namanegara, CC BY-SA 3.0 (cropped)

छोटा जवाब

धान का झोंका (ब्लास्ट) रोग (तेलुगु में अग्गि तेगुलु, हिंदी में झोंका रोग) एक फफूंद रोग है। यह पत्तियों पर आँख जैसे धब्बे बनाता है, गाँठों को काला कर देता है और बाली की गर्दन को सड़ा देता है, जिससे दाने खाली रह जाते हैं। इसकी रोकथाम साफ बीज, बीज उपचार, सहनशील किस्मों और संतुलित नाइट्रोजन से करें। साथ में पत्ती पर पहले धब्बे दिखते ही और बालियाँ निकलने से पहले लेबल पर मंज़ूर फफूंदनाशक छिड़कें।

इसकी फफूंद Magnaporthe oryzae है (इसे Pyricularia oryzae भी कहते हैं)। किसान इसके तीन मुख्य रूप बताते हैं: पत्ती झोंका, गाँठ झोंका और गर्दन झोंका। उपज को सबसे ज़्यादा नुकसान गर्दन झोंका से होता है।

धान में झोंका रोग की पहचान कैसे करें

झोंका रोग नर्सरी से लेकर दाना भरने तक फसल की किसी भी अवस्था में, और ज़मीन के ऊपर के हर हिस्से पर लग सकता है। भारत सरकार का पौध संरक्षण कार्यालय (DPPQS) बताता है कि पत्ती और गर्दन का संक्रमण सबसे ज़्यादा नुकसान करता है।

  • पत्ती झोंका: शुरुआत छोटे नीले-हरे धब्बों से होती है। नम मौसम में ये बढ़कर तकले जैसे धब्बे बन जाते हैं, जो बीच में चौड़े और दोनों सिरों पर नुकीले होते हैं, बिल्कुल आँख की तरह। बीच का हिस्सा स्लेटी और किनारा गहरा भूरा हो जाता है। धब्बे आपस में मिल जाते हैं और पूरी पत्तियाँ सूख जाती हैं। बुरी तरह प्रभावित नर्सरी या छोटी फसल दूर से जली हुई दिखती है।
  • कॉलर झोंका: TNAU पत्ती के कॉलर को उन हिस्सों में गिनता है जिन पर झोंका हमला करता है। कॉलर वह जोड़ है जहाँ पत्ती का खुला हिस्सा तने पर लिपटे पत्ती के खोल (शीथ) से मिलता है। यह भूरा हो जाता है, और इसके ऊपर की पत्ती सूखकर मर सकती है। झंडा पत्ती (सबसे ऊपर की पत्ती) पर ऐसा हो तो दाना भरने पर बुरा असर पड़ता है।
  • गाँठ झोंका: गाँठों (तने के जोड़) के चारों ओर काले धब्बे बन जाते हैं। तना गाँठ पर से टूट सकता है, और उसके ऊपर का सारा हिस्सा मर जाता है।
  • गर्दन झोंका (तेलुगु में मेडविरुपु): बाली के ठीक नीचे गर्दन के चारों ओर स्लेटी-भूरे से काले रंग का धब्बा बन जाता है। बाली सफेद या स्लेटी होकर गिर जाती है। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) बताता है कि अगर दूधिया अवस्था से पहले गर्दन पर हमला हो, तो दाना बनता ही नहीं। बाद में हमला हो तो दाने हल्के और कमज़ोर रहते हैं।
धान की पत्ती पर पत्ती झोंका: स्लेटी बीच और गहरे भूरे किनारे वाला आँख जैसा एक धब्बा
पत्ती झोंका: स्लेटी बीच और भूरे किनारे वाला आँख जैसा धब्बा, फोटो: USDA Agricultural Research Service, public domain

मिलते-जुलते रोग और उनमें फर्क कैसे करें

  • भूरा धब्बा (brown spot): धब्बे अंडाकार या गोल और भूरे होते हैं, अक्सर उनके चारों ओर पीला घेरा होता है, और उनके सिरे झोंका के धब्बों की तरह नुकीले नहीं होते। यह कमज़ोर या पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टी में आम है।
  • शीथ ब्लाइट (पर्णच्छद झुलसा): पानी की सतह के पास पत्ती के खोल (शीथ) पर बड़े स्लेटी-हरे धब्बे, पत्ती के खुले हिस्से पर आँख जैसे धब्बे नहीं। हमारा शीथ ब्लाइट वाला लेख देखें।
  • जीवाणु पत्ती झुलसा (bacterial leaf blight): पीली से पुआल के रंग की धारियाँ, जो पत्ती की नोक या किनारे से शुरू होकर लहरदार किनारे के साथ पत्ती में नीचे की ओर बढ़ती हैं।
  • तना छेदक से सफेद बाली: इसमें भी बाली सफेद हो जाती है, लेकिन वह आसानी से खिंचकर बाहर आ जाती है, और तने में छेद होता है या अंदर इल्ली होती है। गर्दन काली नहीं होती। हमारा तना छेदक वाला लेख देखें।

झोंका रोग का जीवन चक्र और इसे बढ़ाने वाला मौसम

झोंका की फफूंद दो फसलों के बीच के समय में संक्रमित पुआल, बीज और मेड़ों पर उगी घास वाले खरपतवारों में ज़िंदा रहती है, जैसे Panicum repens। वहाँ से इसके बीजाणु (फफूंद के बहुत छोटे बीज) हवा और सिंचाई के पानी के साथ फैलते हैं। TNAU बताता है कि बीजाणु साल भर हवा में रहते हैं। बीजाणु गीली पत्ती पर गिरता है, अंदर घुसता है, और लगभग एक हफ्ते में नया धब्बा खुद बीजाणु बनाने लगता है। इसी वजह से झोंका पूरे खेत में बहुत तेज़ी से फैल सकता है।

TNAU और DPPQS की झोंका सलाह (2022) इसे बढ़ाने वाली स्थितियाँ बताती हैं:

  • बादल वाला मौसम, रुक-रुक कर बूँदाबाँदी, और सुबह ओस।
  • हवा में बहुत ज़्यादा नमी (relative humidity लगभग 93% से ऊपर) और पत्तियाँ जो लगभग 10 घंटे से ज़्यादा गीली रहें।
  • हल्का, ठंडा मौसम। TNAU रात का तापमान 15–20 °C बताता है, और DPPQS झोंका के लिए अनुकूल दायरा 22–28 °C बताता है।
  • बहुत ज़्यादा नाइट्रोजन खाद।
  • बहुत घनी फसल, जिसमें पत्तियाँ ज़्यादा देर तक गीली रहती हैं।
  • सूखी, हवादार (एरोबिक) मिट्टी, या खेत में पानी का सुझाए गए स्तर से नीचे चले जाना।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में ये स्थितियाँ रबी धान में आम हैं, जब रातें ठंडी होती हैं और ओस भारी गिरती है। देर खरीफ में भी ऐसा होता है, जब बादल और बूँदाबाँदी का दौर फसल के कल्ले निकलने या बालियाँ निकलने के समय आता है। ऐसे दौर में खेत पर कड़ी नज़र रखें।

यह किन फसलों पर लगता है

धान: नर्सरी और छोटी फसल पर पत्ती झोंका लगता है, जो पौधों को सीधे मार सकता है। कल्ले निकलने के समय पत्ती झोंका हरी पत्तियों का हिस्सा घटा देता है। गभोट (बूटिंग) से दाना भरने तक गर्दन और गाँठ झोंका सबसे ज़्यादा नुकसान करते हैं, क्योंकि ये दाने को भरने नहीं देते। उपज का सबसे बड़ा नुकसान गर्दन झोंका से होता है। इससे मिलती-जुलती एक झोंका फफूंद गेहूँ और कुछ मोटे अनाजों पर भी लगती है, लेकिन यह लेख सिर्फ धान के बारे में है।

झोंका रोग के लिए कब छिड़काव करें (आर्थिक सीमा)

आर्थिक सीमा (ETL) रोग का वह स्तर है जिस पर छिड़काव का खर्च वसूल होने लगता है। धान के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन पैकेज (NCIPM, DPPQS और NIPHM) यह सीमा बताता है:

  • पत्ती झोंका: प्रति पत्ती 3–5 धब्बे, कल्ले निकलने की शुरुआत से आखिर तक।
  • गर्दन झोंका: प्रति वर्ग मीटर 2–5 पौधे जिनकी गर्दन संक्रमित हो, बाली बनने की शुरुआत से गभोट तक।

फफूंदनाशक स्वस्थ पत्तियों और गर्दनों को बचाते हैं; जो पत्ती या बाली पहले ही मर चुकी है, उसे वापस ठीक नहीं कर सकते। इसलिए रोग के फैलने का इंतज़ार न करें। बादल, नमी या ओस वाले दौर में हफ्ते में दो बार खेत देखें। सिर्फ मेड़ पर नहीं, खेत के बीच से होकर चलें, और ऊपर की पत्तियों और झंडा पत्ती को देखें। पहले धब्बे दिखते ही कदम उठाएँ। गर्दन झोंका के लिए बचाव का छिड़काव बालियाँ निकलने से पहले या निकलते समय होना चाहिए।

बिना रसायन के झोंका रोग की रोकथाम कैसे करें

  • साफ बीज: प्रमाणित, रोग-मुक्त बीज इस्तेमाल करें। संक्रमित बीज फफूंद को नई फसल में ले आता है।
  • बीज और पौध उपचार: DPPQS सलाह देता है कि बीज को Pseudomonas fluorescens 0.5% WP से 10 g प्रति kg बीज की दर से उपचारित करें, और रोपाई से पहले पौध को Pseudomonas fluorescens के घोल (5 g प्रति लीटर पानी) में 20 मिनट तक डुबोएँ।
  • सहनशील किस्में: धान का IPM पैकेज झोंका सहने वाली किस्में बताता है, जैसे Rasi, Vikas, Krishna Hamsa, Tulasi, IR 64 और Swarnadhan। अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से पूछें कि आपके इलाके और मौसम के लिए कौन सी सही हैं।
  • संतुलित नाइट्रोजन: यूरिया ज़्यादा न डालें। इसे कई बार में बाँटकर दें। झोंका वाले मौसम में, रोग काबू में आने तक ऊपर से दी जाने वाली खाद (टॉप ड्रेसिंग) रोक कर रखें।
  • दूरी: अपनी किस्म के लिए सामान्य दूरी पर रोपाई करें। बहुत घनी फसल ज़्यादा देर गीली रहती है और झोंका को बढ़ावा देती है। ज़्यादा नाइट्रोजन से भी फसल घनी और नरम हो जाती है। असली नाइट्रोजन की कमी और पत्ती के सामान्य रंग में फर्क जानने के लिए हमारी गाइड पौधों में नाइट्रोजन की कमी के लक्षण देखें।
  • पानी: खेत में सुझाया गया पानी का स्तर बनाए रखें। DPPQS बताता है कि जहाँ पानी उस स्तर से नीचे चला जाता है, वहाँ झोंका ज़्यादा होता है।
  • साफ मेड़ें: TNAU की सलाह के अनुसार मेड़ों और नालियों से घास वाले खरपतवार हटाएँ।
  • खेत की सफाई: संक्रमित पौधों के हिस्से निकालकर नष्ट करें। कटाई के बाद संक्रमित पुआल और ठूँठ हटा दें। धान के बाद कोई दूसरी फसल लेने (फसल चक्र) से भी मदद मिलती है।

झोंका रोग के लिए फफूंदनाशक: धान में रासायनिक रोकथाम

यहाँ सिर्फ वही उत्पाद दिए गए हैं जिनके आधिकारिक लेबल या पर्चे पर धान और झोंका रोग लिखा है। मात्रा प्रति एकड़ है, जैसी लेबल पर छपी है या लेबल की प्रति हेक्टेयर मात्रा से निकाली गई है। जहाँ लेबल पर सिर्फ प्रति लीटर घोल की ताकत दी है, वहाँ हमने "लेबल के अनुसार मात्रा" लिखा है और वही ताकत बताई है। एक बार में एक ही उत्पाद छिड़कें। एक टंकी में कई उत्पाद न मिलाएँ।

धान

उत्पादइसमें क्या हैलेबल मात्रा प्रति एकड़पानी प्रति एकड़कटाई से पहले इंतज़ार
Baan FungicideTricyclazole 75% WP121–162 g200 L30 दिन
Galileo Sensa FungicidePicoxystrobin 6.78% + Tricyclazole 20.33% SC400 ml200 Lब्रांड के पर्चे पर नहीं छपा; पैक का लेबल देखें
Merger FungicideTricyclazole 18% + Mancozeb 62% WP405–506 g200 L25 दिन
Yamakazi FungicidePyraclostrobin 10% + Thifluzamide 10% SC324–364 ml200 L18 दिन
Amistar Top FungicideAzoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SCलेबल के अनुसार मात्रा: 0.1%, यानी 1 ml प्रति लीटर पानी200 L31 दिन
Motive FungicideMancozeb 68% + Hexaconazole 4% WG506 g200 L30 दिन
Avtar FungicideHexaconazole 4% + Zineb 68% WP405–506 g200 L34 दिन
Indofil M45 FungicideMancozeb 75% WP0.6–0.8 kg300 L20 दिन
Polyram - FungicideMetiram 70% WG607–809 g200 L51 दिन
Companion FungicideCarbendazim 12% + Mancozeb 63% WP304 g300 L57 दिन
Saaf FungicideCarbendazim 12% + Mancozeb 63% WP304 g300 L57 दिन
Saafilizer Systemic and Contact FungicideCarbendazim 12% + Mancozeb 63% WP304 g300 L57 दिन

लेबल से ज़रूरी बातें:

  • Galileo Sensa, Merger, Yamakazi, Amistar Top, Motive, Avtar, Companion, Saaf और Saafilizer, हर एक के पैक में दो सक्रिय तत्व हैं। ये लेबल पर मंज़ूर, पहले से मिले हुए (रेडी-मिक्स) उत्पाद हैं। ये टंकी में खुद मिलाए गए घोल नहीं हैं।
  • Baan: पत्ती झोंका के लिए पहले लक्षण दिखते ही छिड़कें। गर्दन (बाली) झोंका के लिए गभोट की आखिरी अवस्था में, बालियाँ निकलने से पहले छिड़कें। हॉलो कोन नोज़ल वाले नैपसैक स्प्रेयर का इस्तेमाल करें।
  • Baan से बीज उपचार: 10 kg बीज के लिए 30 g उत्पाद, 10 kg बीज पर 1 L पानी के साथ, सीड ड्रम में मिलाकर।
  • Galileo Sensa: पत्ती झोंका के लिए बचाव का छिड़काव तब करें जब 100 में से 3 से कम पत्तियों पर झोंका दिखे। गर्दन झोंका के लिए बालियाँ निकलने से पहले छिड़कें, और ज़रूरत हो तो 10–14 दिन बाद दूधिया अवस्था पर दूसरा छिड़काव करें। एक फसल में 2 से ज़्यादा छिड़काव नहीं।
  • Merger और Motive: लक्षण दिखने पर सुबह या शाम को छिड़कें, रोग कितना गंभीर है उसके अनुसार 1–3 छिड़काव।
  • Yamakazi: पत्ती झोंका दिखने पर छिड़कें, 10–15 दिन के अंतर पर 1–2 छिड़काव।
  • Amistar Top: रोग दिखने पर 1–2 छिड़काव।
  • Saaf और Saafilizer: लक्षण दिखते ही छिड़कें।

उत्पाद चुनते समय इंतज़ार की अवधि का ध्यान रखें। Companion, Saaf और Saafilizer में आखिरी छिड़काव और कटाई के बीच 57 दिन चाहिए, और Polyram में 51 दिन। उत्पाद चुनने से पहले गिन लें कि आपकी अनुमानित कटाई में कितने दिन बचे हैं, खासकर गर्दन झोंका के देर से होने वाले छिड़काव के लिए।

प्रतिरोध से बचने के लिए दवा बदल-बदल कर डालें

अगर आप एक ही तरह का फफूंदनाशक बार-बार छिड़कते हैं, तो फफूंद पर उसका असर होना बंद हो सकता है। फफूंदनाशकों को उनके काम करने के तरीके के अनुसार FRAC कोड से ग्रुप में बाँटा जाता है (FRAC यानी Fungicide Resistance Action Committee, फफूंदनाशक प्रतिरोध पर काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय समिति)। एक छिड़काव से अगले छिड़काव में ग्रुप बदलें।

FRAC ग्रुपसक्रिय तत्वइस लेख के उत्पाद
16.1TricyclazoleBaan, और Galileo Sensa व Merger का एक हिस्सा
11 (strobilurins)Picoxystrobin, pyraclostrobin, azoxystrobinGalileo Sensa, Yamakazi और Amistar Top का एक हिस्सा
3 (triazoles)Hexaconazole, difenoconazoleMotive, Avtar और Amistar Top का एक हिस्सा
7 (SDHI)ThifluzamideYamakazi का एक हिस्सा
1CarbendazimCompanion, Saaf और Saafilizer का एक हिस्सा
M03 (कई जगह असर करने वाले संपर्क फफूंदनाशक)Mancozeb, zineb, metiramIndofil M45, Polyram, और Merger, Motive, Avtar, Companion, Saaf व Saafilizer का एक हिस्सा

ग्रुप 11 में प्रतिरोध का खतरा ज़्यादा है, इसलिए Galileo Sensa, Yamakazi और Amistar Top को लगातार एक के बाद एक छिड़काव में इस्तेमाल न करें। एक आसान योजना: अगर पहला छिड़काव tricyclazole वाले उत्पाद (ग्रुप 16.1) का था, तो दूसरा किसी दूसरे ग्रुप के उत्पाद का करें, जैसे Yamakazi (ग्रुप 11 और 7) या Motive (ग्रुप M03 और 3)। ग्रुप M03 के संपर्क फफूंदनाशकों में प्रतिरोध का खतरा कम है, लेकिन ये सिर्फ उसी सतह को बचाते हैं जिस पर पड़ते हैं। हर लेबल में जितने छिड़काव की अनुमति है, उससे ज़्यादा न करें।

सुरक्षा और इंतज़ार की अवधि

  • हर उत्पाद के लिए कटाई से पहले इंतज़ार की अवधि (PHI, pre-harvest interval) ऊपर की तालिका में दी है। दिन आखिरी छिड़काव से गिनें।
  • घोल बनाते और छिड़कते समय दस्ताने, मास्क, पूरी बाँह के कपड़े और जूते पहनें। छिड़काव के दौरान कुछ न खाएँ, न पिएँ और न धूम्रपान करें। बाद में अच्छी तरह नहाएँ-धोएँ।
  • सुबह या शाम को छिड़कें, तेज़ हवा में या बारिश से ठीक पहले नहीं।
  • मछली: Amistar Top और Galileo Sensa के लेबल कहते हैं कि जहाँ धान और मछली साथ पाली जाती हैं, वहाँ इनका इस्तेमाल न करें। Merger, Motive और Saaf के लेबल चेतावनी देते हैं कि ये मछली या पानी के जीवों के लिए ज़हरीले हैं, इसलिए इन्हें तालाबों और मछली पालन से दूर रखें।
  • बासमती और निर्यात वाला धान: पंजाब ने कुछ सालों में बासमती के लिए tricyclazole और hexaconazole की बिक्री रोकी है, क्योंकि खरीदार देशों में अवशेष (residue) की सीमाएँ तय हैं। अगर आप बासमती या निर्यात के लिए धान उगाते हैं, तो छिड़काव से पहले अपने राज्य के मौजूदा नियम और खरीदार की अवशेष सीमा जाँच लें।
  • इस्तेमाल से पहले लेबल और पर्चा पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

धान में झोंका रोग किस वजह से होता है?

एक फफूंद से, Magnaporthe oryzae। इसके बीजाणु संक्रमित पुआल, बीज और घास वाले खरपतवारों से हवा और पानी के साथ फैलते हैं। ठंडी रातें, ओस, बूँदाबाँदी और ज़्यादा नाइट्रोजन इसे फैलने में मदद करते हैं।

बालियाँ सफेद होने के बाद क्या धान का गर्दन झोंका ठीक हो सकता है?

नहीं। जिस बाली की गर्दन सड़ गई है, उसमें दाना नहीं भरेगा। छिड़काव सिर्फ उन गर्दनों को बचा सकता है जो अभी स्वस्थ हैं। इसीलिए गर्दन झोंका का छिड़काव बालियाँ निकलने से पहले या निकलते समय किया जाता है।

धान में पत्ती झोंका और भूरा धब्बा रोग में फर्क कैसे पहचानें?

पत्ती झोंका के धब्बे आँख जैसे होते हैं, दोनों सिरों पर नुकीले, बीच में स्लेटी और किनारा भूरा। भूरा धब्बा रोग के धब्बे छोटे, गोल या अंडाकार, और पूरे भूरे होते हैं, अक्सर पीले घेरे के साथ।

धान के झोंका रोग के लिए कौन सा फफूंदनाशक इस्तेमाल होता है?

ऐसा फफूंदनाशक लें जिसके लेबल पर धान और झोंका रोग लिखा हो। हमारे स्टोर में ये हैं: Baan, Galileo Sensa, Merger, Yamakazi, Amistar Top, Motive, Avtar, Indofil M45, Polyram, Companion, Saaf और Saafilizer। मात्रा ऊपर की तालिका में है। दो छिड़कावों के बीच FRAC ग्रुप बदलें।

धान में गर्दन झोंका के लिए कब छिड़काव करें?

बालियाँ निकलने से पहले या निकलते समय। Baan का लेबल गभोट की आखिरी अवस्था बताता है। बालियाँ सफेद होने तक इंतज़ार न करें। ज़रूरत हो तो Galileo Sensa का लेबल 10–14 दिन बाद, दूधिया अवस्था पर, दूसरे छिड़काव की अनुमति देता है। पहले हर उत्पाद की कटाई से पहले इंतज़ार की अवधि जाँच लें।

क्या बीज उपचार से झोंका रोग में मदद मिलती है?

हाँ। इससे बीज के साथ आने वाली फफूंद कम होती है और नर्सरी सुरक्षित रहती है। Baan के लेबल पर बीज उपचार की दर दी गई है, और DPPQS जैविक बीज उपचार के लिए Pseudomonas fluorescens की सलाह देता है।

और पढ़ें

स्रोत

फसल के अनुसार इसे नियंत्रित करने वाले उत्पाद

धान

एक ही उत्पाद बार-बार न छिड़कें। अलग क्रिया-विधि (लेबल पर ग्रुप नंबर) वाले उत्पाद से बदलें, ताकि कीट या रोग में प्रतिरोध न बने।

ब्रांड के आधिकारिक लेबल के अनुसार। इस्तेमाल से पहले लेबल पढ़ें।

₹275 एमआरपी₹363बचत ₹88

गैलीलियो सेन्सा-फफूंदनाशक
+1

₹2,125/L

₹850 एमआरपी₹1,138बचत ₹288

विलय-कवकनाशी
+2+1

₹350 एमआरपी₹465बचत ₹115

₹1,100 एमआरपी₹1,848बचत ₹748

₹1,040 एमआरपी₹1,427बचत ₹387

Motive Fungicide
+1

₹1,370/kg

₹685 एमआरपी₹855बचत ₹170

अवतार-फफूंदनाशक
+2+1

₹320 एमआरपी₹434बचत ₹114

इंडोफिल एम-45-फफूंदनाशक
+2+1

₹170 एमआरपी₹182बचत ₹12

₹498 एमआरपी₹654बचत ₹156

साथी-कवकनाशी
+2+1

₹190 एमआरपी₹270बचत ₹80

साफ - कवकनाशक
+2+1

₹892/kg

₹223 एमआरपी₹250बचत ₹27

₹515 एमआरपी₹960बचत ₹445

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