आलू और टमाटर का पछेती झुलसा: लक्षण, कारण और रोकथाम

· लेखक: AgriVruddhi

Late blight of potato on a leaf: brown dead patch ringed by pale white downy growth of Phytophthora infestans

ऊपर की फोटो: आलू की पत्ती पर पछेती झुलसा: एक भूरा धब्बा, जिसके चारों ओर सफेद रोएँदार बढ़वार है, फोटो: Björn Andersson (SLU), CC BY-SA 4.0

छोटा जवाब

आलू का पछेती झुलसा Phytophthora infestans से होता है। यह एक जल फफूंद (वॉटर मोल्ड) है, जो टमाटर पर भी लगती है। इसमें पत्तियों पर गहरे, पानी से भीगे जैसे धब्बे बनते हैं, जिनके नीचे सफेद बढ़वार होती है। फिर तने, कंद और फल सड़ने लगते हैं। ठंडे और गीले मौसम में यह दो हफ्ते के अंदर पूरा खेत बर्बाद कर सकता है। स्वस्थ बीज लगाएँ, फसल में हवा चलने दें, और पहले धब्बे दिखने से पहले या उसी समय बचाव वाले फफूंदनाशक का छिड़काव शुरू करें।

जल फफूंद एक फफूंद जैसा जीव है, जो पानी और नम हवा में बीजाणुओं (spores) से फैलता है। 1840 के दशक में आयरलैंड का आलू अकाल पछेती झुलसा से ही पड़ा था, और आज भी यह भारत में आलू के सबसे गंभीर रोगों में से एक है।

आलू और टमाटर में पछेती झुलसा की पहचान कैसे करें

हिंदी में इस रोग को पछेती झुलसा कहते हैं। फसल को सुबह जल्दी देखें, जब पत्तियाँ अभी गीली हों। उसी समय इसके लक्षण सबसे आसानी से दिखते हैं।

आलू में पछेती झुलसा के लक्षण

  • पत्तियाँ: हल्के हरे, पानी से भीगे जैसे धब्बे, अक्सर पत्ती की नोक या किनारे पर। तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) के अनुसार ये धब्बे बढ़ते हैं और बैंगनी-भूरे, फिर काले हो जाते हैं।
  • पत्ती के नीचे: गहरे धब्बे के किनारे के चारों ओर सफेद, रोएँदार बढ़वार का पतला घेरा, जो नमी वाली सुबह में सबसे आसानी से दिखता है। यहीं फफूंद बीजाणु बना रही होती है।
  • तने: भूरे से काले धब्बे। तने अक्सर गाँठों पर टूट जाते हैं और पौधा गिर जाता है।
  • कंद: छिलके पर भूरे धब्बे। कंद को काटने पर जंग जैसे भूरे रंग की सड़न छिलके से बीच की ओर जाती दिखती है। भंडारण में अक्सर दूसरी सड़नें भी लग जाती हैं।
  • खेत में: रोगी पौधे झुलसे हुए लगते हैं, और ज़्यादा प्रभावित खेत से सड़ी हुई गंध आती है।
हाथ में कटा हुआ आलू का कंद, जिसमें पछेती झुलसा की जंग जैसी भूरी सड़न छिलके से अंदर फैल रही है
कटा हुआ आलू का कंद, जिसमें पछेती झुलसा की सड़न छिलके से अंदर फैल रही है, फोटो: Howard F. Schwartz, Colorado State University, CC BY 3.0 US

टमाटर में पछेती झुलसा के लक्षण

  • पत्तियाँ: बड़े, बेढंगे, धूसर-हरे से भूरे धब्बे, जो चिकने या पानी से भीगे जैसे दिखते हैं। नमी वाले मौसम में पत्ती के नीचे सफेद बढ़वार होती है।
  • तने और पत्ती के डंठल: लंबे, गहरे भूरे धब्बे। धब्बे के ऊपर का तना गिर सकता है।
  • फल: सख्त, चिकने, जैतूनी से गहरे भूरे धब्बे, ज़्यादातर हरे फलों पर और अक्सर फल के ऊपरी आधे हिस्से पर। धब्बा शुरू में सख्त रहता है और बाद में सड़ सकता है।
टमाटर का पछेती झुलसा: सूखी पत्तियों वाले पौधे पर हरे टमाटरों पर सख्त, भूरे, चिकने धब्बे
हरे टमाटरों पर पछेती झुलसा: सख्त, भूरे, चिकने धब्बे, फोटो: Scot Nelson, CC0

मिलते-जुलते रोग और उनमें फर्क कैसे करें

  • अगेती झुलसा: छोटे भूरे धब्बे, जिनके अंदर निशाने (टारगेट) जैसे छल्ले होते हैं और किनारा पीला होता है। यह पुरानी, निचली पत्तियों से शुरू होता है और धीरे फैलता है। पछेती झुलसा के धब्बे बड़े और पानी से भीगे जैसे होते हैं, उनमें छल्ले नहीं होते, नीचे सफेद बढ़वार दिखती है, और ठंडे, गीले मौसम में यह कुछ ही दिनों में पूरे खेत में फैल सकता है। हमारी गाइड देखें: टमाटर और आलू का अगेती झुलसा।
  • टमाटर की बकआई सड़न (buckeye rot): मिट्टी को छूने वाले फलों पर लगती है। फल पर भूरे धब्बे में साफ छल्ले होते हैं। पछेती झुलसा के फल वाले धब्बों में छल्ले नहीं होते और ये अक्सर फल के ऊपरी हिस्से पर होते हैं।
  • पाला या धूप से झुलसन: नुकसान एक ही ठंडी रात या गर्म दिन के बाद एक साथ दिखता है, इसमें सफेद बढ़वार नहीं होती और यह आगे नहीं फैलता।

पछेती झुलसा के कारण और इसे फैलाने वाला मौसम

यह रोग संक्रमित बीज कंदों, पौधों के कचरे और पिछली फसल से अपने-आप उगे आलू के पौधों से शुरू होता है। TNAU के अनुसार संक्रमित कंद और संक्रमित मिट्टी इसका पहला स्रोत हैं। पहले रोगी पौधों से बीजाणु हवा से और बारिश की छींटों से पास की पत्तियों तक पहुँचते हैं। गीले मौसम में हर धब्बा बहुत ज़्यादा नए बीजाणु बनाता है, इसलिए रोग बहुत तेज़ी से फैलता है।

TNAU इसके लिए अनुकूल मौसम ये बताता है:

  • हवा में नमी 90% से ज़्यादा
  • तापमान 10–25 °C, और रात का तापमान लगभग 10 °C
  • बारिश से पहले बादल वाला मौसम, और अगले दिनों में बारिश

भारत के मैदानी इलाकों में आलू ठंडे रबी मौसम में उगाया जाता है। सर्दियों के ठंडे, कोहरे वाले और बूंदाबांदी वाले दिनों में, और पहाड़ों में बारिश के मौसम में पछेती झुलसा का सबसे ज़्यादा डर रहता है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में सर्दी के महीनों में ठंडे, बादल वाले और गीले दिनों में, और ठंडे, ऊँचे इलाकों में टमाटर और आलू पर सबसे ज़्यादा नज़र रखें।

यह किन फसलों पर लगता है: आलू और टमाटर

आलू: पत्तियाँ, तने और कंद, सब पर हमला होता है। पत्तियाँ कम होने से कंद की बढ़वार घटती है। संक्रमित कंद खेत में और भंडारण में सड़ते हैं, और बीज के रूप में इस्तेमाल हों तो अगली फसल में रोग ले जाते हैं।

टमाटर: पत्तियाँ, तने और फल, सब पर हमला होता है। यह रोग किसी भी अवस्था में लग सकता है, पर सबसे ज़्यादा नुकसान तब होता है जब यह फल लगने के बाद पौधों तक पहुँचता है, क्योंकि हरे फल सड़ जाते हैं और बिक नहीं पाते।

पछेती झुलसा के लिए छिड़काव कब करें

हम पछेती झुलसा के लिए आर्थिक सीमा (कीट या रोग का वह स्तर जिस पर छिड़काव फायदेमंद होता है) किसी मान्य सार्वजनिक स्रोत से पक्की नहीं कर पाए, इसलिए हम यहाँ कोई सीमा नहीं दे रहे। पछेती झुलसा इतनी तेज़ी से फैलता है कि नुकसान बढ़ने का इंतज़ार नहीं किया जा सकता। नीचे दी गई दवाएँ मुख्य रूप से बीजाणु गिरने से पहले पत्ती को बचाकर काम करती हैं। इसलिए जैसे ही ठंडा, बादल वाला, नमी वाला मौसम शुरू हो, या पहले ही धब्बे दिखें, छिड़काव शुरू करें, और जब तक वह मौसम रहे, पत्तियों को दवा से ढका रखें।

मौसम की चेतावनी पहले छिड़काव का समय तय करने में मदद करती है। ICAR-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला ने पछेती झुलसा का पूर्वानुमान बताने वाला मॉडल Indo-Blightcast बनाया है, जो रोज़ के तापमान और नमी का इस्तेमाल करता है। अपने कृषि अधिकारी या KVK से पूछें कि क्या आपके इलाके के लिए झुलसा की चेतावनी जारी होती है।

बिना रसायन के रोकथाम

  • स्वस्थ बीज: प्रमाणित, रोग-मुक्त बीज कंद लगाएँ। जिस खेत में पछेती झुलसा लगा हो, उसके कंद बीज के लिए इस्तेमाल न करें।
  • रोग-रोधी किस्में: TNAU आलू की कुछ पछेती झुलसा रोधी किस्में बताता है, जैसे Kufri Naveen और Kufri Jeevan। अपने स्थानीय कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से पूछें कि आपके इलाके में कौन सी रोधी किस्में मिलती हैं। ज़्यादा बारिश वाले इलाकों में टमाटर के लिए Indian Horticulture में छपा ICAR का एक लेख Arka Abhed F1 किस्म की सलाह देता है।
  • अच्छी मिट्टी चढ़ाएँ: आलू के कंदों को पर्याप्त मिट्टी से ढकें, ताकि पत्तियों से बहकर नीचे आने वाले बीजाणु उन तक न पहुँचें।
  • हवा और पानी: सलाह दी गई दूरी पर पौधे लगाएँ। पानी की निकासी अच्छी रखें। ऊपर से पानी देने से बचें, और दिन ढलने पर पानी न दें, ताकि पत्तियाँ जल्दी सूख जाएँ।
  • टमाटर की देखभाल: पौधों को सहारा (डंडी) दें और सबसे नीचे की पत्तियाँ हटा दें, ताकि फसल के बीच हवा चले। टमाटर को आलू के पास न उगाएँ।
  • रोग के स्रोत हटाएँ: अपने-आप उगे आलू के पौधे उखाड़ दें और कचरे या सड़े कंदों के ढेर नष्ट करें। ज़्यादा रोगी पौधों को निकालकर खेत से दूर नष्ट करें।
  • खुदाई से पहले: TNAU की सलाह है कि खुदाई से कुछ दिन पहले आलू की पत्तियाँ और डंठल नष्ट कर दें। खुदाई में कंदों को चोट न पहुँचाएँ, और सड़न वाले कंद भंडार में न रखें।
  • फसल चक्र: एक ही खेत में हर मौसम आलू या टमाटर न उगाएँ।

आलू और टमाटर के पछेती झुलसा के लिए फफूंदनाशक, फसल के हिसाब से

सिर्फ नीचे दी गई दवाओं के आधिकारिक लेबल पर यह फसल और पछेती झुलसा दर्ज है। मात्रा प्रति एकड़ है, जैसी लेबल पर छपी है या लेबल की प्रति हेक्टेयर मात्रा से बदली गई है। जहाँ लेबल पर सिर्फ प्रति लीटर ताकत दी है, वहाँ हम "मात्रा लेबल के अनुसार" लिखते हैं और वह ताकत बताते हैं। एक बार में एक ही दवा इस्तेमाल करें। एक टंकी में दवाएँ न मिलाएँ। पत्तियों के दोनों तरफ अच्छी तरह छिड़काव करें।

आलू: पछेती झुलसा के लिए फफूंदनाशक

दवाइसमें क्या हैलेबल मात्रा प्रति एकड़पानी प्रति एकड़तुड़ाई/खुदाई से पहले इंतज़ार
Indofil M45 FungicideMancozeb 75% WP0.6–0.8 kg300 L20 दिन
Polyram FungicideMetiram 70% WG809 g200–300 L21 दिन
Companion FungicideCarbendazim 12% + Mancozeb 63% WP708 g200 L47 दिन
Saaf FungicideCarbendazim 12% + Mancozeb 63% WP708 g200 L47 दिन
Saafilizer Systemic and Contact FungicideCarbendazim 12% + Mancozeb 63% WP708 g200 L47 दिन

लेबल से नोट:

  • Indofil M45: पत्तियों पर छिड़काव।
  • Saaf: रोग के लक्षण दिखते ही छिड़काव करें।
  • Companion, Saaf और Saafilizer में एक ही पैक में वही दो सक्रिय तत्व हैं। ये लेबल पर मंज़ूर पहले से मिली हुई दवाएँ हैं, टंकी में मिलाई गई दवाएँ नहीं। इन्हें तीन नहीं, एक ही विकल्प मानें।
  • Companion, Saaf और Saafilizer में खुदाई से पहले 47 दिन का इंतज़ार ज़रूरी है। अगर खुदाई पास है, तो दवा चुनने से पहले इंतज़ार की अवधि जाँच लें।

टमाटर: पछेती झुलसा के लिए फफूंदनाशक

दवाइसमें क्या हैलेबल मात्रा प्रति एकड़पानी प्रति एकड़तुड़ाई से पहले इंतज़ार
Kavach Flo FungicideChlorothalonil 40% + Difenoconazole 4% SC405 ml200 L7 दिन
Amistar Top FungicideAzoxystrobin 18.2% + Difenoconazole 11.4% SCमात्रा लेबल के अनुसार: 0.1%, यानी 1 ml प्रति लीटर पानी200 L5 दिन
Indofil M45 FungicideMancozeb 75% WP0.6–0.8 kg300 L10 दिन

लेबल से नोट:

  • Kavach Flo: पहला छिड़काव बचाव के लिए या रोग का पहला लक्षण दिखते ही करें, और 10–15 दिन बाद एक और। एक मौसम में दो से ज़्यादा छिड़काव न करें।
  • Amistar Top: रोग दिखने पर एक या दो छिड़काव।
  • Kavach Flo और Amistar Top, दोनों में एक ही पैक में दो सक्रिय तत्व हैं। ये लेबल पर मंज़ूर पहले से मिली हुई दवाएँ हैं, टंकी में मिलाई गई दवाएँ नहीं।
  • टमाटर बार-बार तोड़े जाते हैं। हर तुड़ाई से पहले इंतज़ार की अवधि जाँच लें।

प्रतिरोध से बचने के लिए दवा बदलें

फफूंदनाशकों को उनके काम करने के तरीके के हिसाब से FRAC कोड से समूहों में बाँटा जाता है (FRAC यानी फफूंदनाशक प्रतिरोध पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय समिति, Fungicide Resistance Action Committee)। हर छिड़काव में समूह बदलने से रोग में दवा के प्रति प्रतिरोध (रेज़िस्टेंस) धीरे बनता है।

FRAC समूहसक्रिय तत्वइस लेख की दवाएँ
M03 (कई जगह असर करने वाली संपर्क दवा)Mancozeb, metiramIndofil M45; Polyram; Companion, Saaf और Saafilizer का एक हिस्सा
M05 (कई जगह असर करने वाली संपर्क दवा)ChlorothalonilKavach Flo का एक हिस्सा
11 (स्ट्रोबिल्यूरिन)AzoxystrobinAmistar Top का एक हिस्सा
3 (ट्राइएज़ोल)DifenoconazoleKavach Flo और Amistar Top का एक हिस्सा
1CarbendazimCompanion, Saaf और Saafilizer का एक हिस्सा

यहाँ एक ज़रूरी बात: पछेती झुलसा एक जल फफूंद है, असली फफूंद नहीं। समूह 1 (carbendazim) और समूह 3 (difenoconazole) असली फफूंदों के लिए हैं और पछेती झुलसा पर इन पर भरोसा नहीं किया जाता। इन पैकों में पछेती झुलसा पर असर mancozeb, chlorothalonil या azoxystrobin वाले हिस्से से आता है। कई जगह असर करने वाली संपर्क दवाओं (समूह M03 और M05) में प्रतिरोध का खतरा कम होता है। समूह 11 में खतरा ज़्यादा है, इसलिए टमाटर पर Amistar Top के लगातार दो छिड़काव न करें: इसे Kavach Flo या Indofil M45 के साथ बदल-बदलकर डालें। हर लेबल में जितने छिड़काव की अनुमति है, उससे ज़्यादा न करें।

सुरक्षा और इंतज़ार की अवधि

  • हर दवा और फसल के लिए कटाई से पहले इंतज़ार की अवधि (PHI, pre-harvest interval) ऊपर की तालिकाओं में दी है। दिन आखिरी छिड़काव से गिनें।
  • दवा घोलते और छिड़कते समय दस्ताने, मास्क, पूरी बाँह के कपड़े और जूते पहनें। काम करते समय कुछ न खाएँ, न पिएँ और न धूम्रपान करें। बाद में अच्छी तरह नहाएँ-धोएँ।
  • हवा शांत हो तब छिड़काव करें। अगर कुछ घंटों में बारिश की संभावना हो, तो रुकें, क्योंकि बारिश संपर्क फफूंदनाशक को पत्ती से धो सकती है।
  • दवा और उसका धोवन तालाबों, नहरों और कुओं से दूर रखें।
  • इस्तेमाल से पहले लेबल और पर्चा पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टमाटर में पछेती झुलसा के लक्षण क्या हैं?

पत्तियों पर बड़े, धूसर-हरे से भूरे, चिकने दिखने वाले धब्बे, जिनके नीचे नमी वाले मौसम में सफेद बढ़वार होती है। तनों पर गहरे भूरे धब्बे। हरे फलों पर सख्त, चिकने भूरे धब्बे, अक्सर ऊपरी हिस्से पर।

आलू के पछेती झुलसा के लिए कौन सी दवा इस्तेमाल होती है?

ऐसी दवा इस्तेमाल करें जिसके लेबल पर आलू और पछेती झुलसा लिखा हो। हमारे स्टोर पर ये Indofil M45, Polyram, Companion, Saaf और Saafilizer हैं। मात्रा ऊपर आलू की तालिका में दी है। पहले धब्बे दिखने से पहले या उसी समय शुरू करें, और जब तक मौसम ठंडा और गीला रहे, पत्तियों को दवा से ढका रखें।

अगेती झुलसा और पछेती झुलसा में क्या फर्क है?

अगेती झुलसा पुरानी पत्तियों पर निशाने जैसे छल्लों वाले छोटे भूरे धब्बे बनाता है और धीरे फैलता है। पछेती झुलसा बड़े, पानी से भीगे जैसे धब्बे बनाता है जिनके नीचे सफेद बढ़वार होती है, इसे ठंडा गीला मौसम पसंद है, और यह कुछ ही दिनों में पूरे खेत में फैल सकता है।

क्या पछेती झुलसा बीज आलू से आ सकता है?

हाँ। TNAU के अनुसार संक्रमित कंद और मिट्टी से रोग शुरू होता है। हमेशा स्वस्थ, प्रमाणित बीज कंद लगाएँ और झुलसा वाले खेत के कंद कभी इस्तेमाल न करें।

क्या बुरी तरह झुलसे खेत को बचाया जा सकता है?

जो पत्तियाँ मर चुकी हैं, वे ठीक नहीं होंगी। छिड़काव हरी पत्तियों और अभी तक स्वस्थ पौधों को बचाता है। आलू में अगर ज़्यादातर पत्तियाँ खत्म हो चुकी हों, तो पत्तियाँ और डंठल नष्ट कर दें और छिलका पक्का होने पर कंद खोद लें, ताकि रोग और कंदों तक न पहुँचे।

और पढ़ें

स्रोत

फसल के अनुसार इसे नियंत्रित करने वाले उत्पाद

आलू

टमाटर

एक ही उत्पाद बार-बार न छिड़कें। अलग क्रिया-विधि (लेबल पर ग्रुप नंबर) वाले उत्पाद से बदलें, ताकि कीट या रोग में प्रतिरोध न बने।

ब्रांड के आधिकारिक लेबल के अनुसार। इस्तेमाल से पहले लेबल पढ़ें।

इंडोफिल एम-45-फफूंदनाशक
+2+1

₹170 एमआरपी₹182बचत ₹12

₹498 एमआरपी₹654बचत ₹156

कवच फ़्लो-फफूंदनाशक400 मिलीलीटर

₹1,738/L

₹695 एमआरपी₹929बचत ₹234

₹1,040 एमआरपी₹1,427बचत ₹387

साथी-कवकनाशी
+2+1

₹190 एमआरपी₹270बचत ₹80

साफ - कवकनाशक
+2+1

₹892/kg

₹223 एमआरपी₹250बचत ₹27

₹515 एमआरपी₹960बचत ₹445

खेती की ये जानकारी पसंद आई? Google पर AgriVruddhi को पसंदीदा स्रोत चुनें

फ़सल स्वास्थ्य गाइड पर वापस जाएँ