कपास में जीवाणु झुलसा रोग (बैक्टीरियल ब्लाइट): लक्षण, फैलाव और नियंत्रण
· लेखक: AgriVruddhi

ऊपर की फ़ोटो: कपास की पत्तियों पर जीवाणु झुलसा के कोणीय धब्बे: नुकीले कोनों वाले छोटे गहरे धब्बे, कुछ आपस में जुड़कर बड़े धब्बे बन गए हैं, फ़ोटो: Kurt C. Showmaker and others (Standards in Genomic Sciences), CC BY 4.0, cropped
सीधा जवाब
कपास का जीवाणु झुलसा रोग (बैक्टीरियल ब्लाइट) एक जीवाणु (बैक्टीरिया) Xanthomonas citri pv. malvacearum से होता है। इससे पत्तियों पर छोटे, गहरे, कोणीय धब्बे बनते हैं, तनों पर काली धारियाँ ("ब्लैक आर्म") पड़ती हैं और टिंडों पर काले, धँसे हुए धब्बे बनते हैं। यह बीज और पुराने फसल अवशेषों के साथ खेत में आता है और बारिश में फैलता है। कोई भी छिड़काव इसे ठीक नहीं करता। साफ़ बीज, प्रतिरोधी किस्में और खेत की सफ़ाई ही इसका उपाय है।
कपास में जीवाणु झुलसा की पहचान कैसे करें: लक्षण
हिंदी में इस रोग को कपास का जीवाणु झुलसा कहते हैं और तेलुगु में పత్తి కోణాకార ఆకుమచ్చ తెగులు। अंग्रेज़ी में इसे angular leaf spot और black arm भी कहते हैं। पुरानी किताबों में इस जीवाणु का नाम Xanthomonas axonopodis pv. malvacearum या Xanthomonas campestris pv. malvacearum मिलता है। रोग वही है।
कपास के लिए भारत सरकार के NIPHM (राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान) के राष्ट्रीय IPM पैकेज के अनुसार यह रोग कपास पर पौध से लेकर टिंडे तक हर अवस्था में आ सकता है। पौधे के हिस्से के हिसाब से लक्षणों के अलग-अलग नाम हैं:
- पौध झुलसा: बीज पत्तों (cotyledons) पर छोटे, गहरे हरे, पानी भीगे जैसे धब्बे, अक्सर किनारे के पास। ये पहले पत्ते के नीचे की तरफ़ दिखते हैं। बीज पत्ते मुड़ सकते हैं और संक्रमण नीचे तने तक जा सकता है। ज़्यादा प्रभावित पौध छोटी रह जाती है या मर जाती है।
- कोणीय पत्ती धब्बा: शुरू में गीले या चिकने दिखने वाले छोटे धब्बे, जो पत्ते के नीचे की तरफ़ साफ़ दिखते हैं। धब्बे छोटी नसों पर आकर रुक जाते हैं, इसलिए उनके कोने नुकीले होते हैं, जैसे छोटे त्रिकोण या चौकोर। वे भूरे और फिर काले हो जाते हैं। कुछ धब्बों के चारों ओर पीला घेरा होता है।
- नस झुलसा: पत्ती की मुख्य नसों के साथ-साथ काली धारियाँ चलती हैं। Cotton Incorporated के अनुसार ये आकाशीय बिजली जैसी दिखती हैं।
- ब्लैक आर्म: रोग पत्ती की डंडी से नीचे शाखाओं और मुख्य तने में उतर जाता है। इससे लंबे, कालिख जैसे काले निशान पड़ते हैं। अगर निशान शाखा के चारों ओर पूरा घूम जाए, तो तेज़ हवा में या टिंडों के वज़न से शाखा टूट सकती है।
- टिंडे पर धब्बे: टिंडों पर गोल, पानी भीगे, चिकने धब्बे। वे धँस जाते हैं और काले हो जाते हैं। अक्सर ये टिंडे के निचले हिस्से में, पत्तीनुमा खोल (ब्रैक्ट) के नीचे या उन रेखाओं पर शुरू होते हैं जहाँ टिंडा बाद में फटता है। संक्रमित टिंडे सड़ सकते हैं, जल्दी गिर सकते हैं या ठीक से नहीं खुलते, और रूई पर दाग लग जाते हैं।
बहुत धब्बों वाली पत्तियाँ फटी-फटी दिखती हैं और जल्दी झड़ जाती हैं।
मिलते-जुलते नुकसान और उन्हें अलग कैसे पहचानें
- अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा: यह फफूंद का रोग है। इसके धब्बे ज़्यादा गोल और भूरे होते हैं, अंदर निशाने जैसे छल्ले अक्सर दिखते हैं, और हरी पत्ती पर किनारा बैंगनी होता है। जीवाणु झुलसा के धब्बों के कोने नुकीले होते हैं, शुरू में नीचे की तरफ़ गीले दिखते हैं और बाद में काले हो जाते हैं। हमारी गाइड देखें: कपास और दूसरी फसलों में अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा और झुलसा।
- ग्रे मिल्ड्यू (राख जैसी फफूंद): यह भी नसों के बीच कोणीय धब्बे बनाती है, और NIPHM चेताता है कि दोनों में धोखा हो जाना आसान है। ग्रे मिल्ड्यू पहले टिंडे बनने के बाद पुरानी, निचली पत्तियों पर शुरू होती है। पत्ती पलटकर देखें: ग्रे मिल्ड्यू में नीचे की तरफ़ सफ़ेद या राख जैसा पाउडर जमाव दिखता है। जीवाणु झुलसा में ऐसा नहीं होता।
- सुंडी का नुकसान: जिन टिंडों में सुंडी घुसती है, वे भी अक्सर सड़ जाते हैं, क्योंकि छेद से जीवाणु अंदर चले जाते हैं। घुसने का छेद या अंदर इल्ली खोजें। हमारी गाइड पढ़ें: कपास में गुलाबी सुंडी के लक्षण और नियंत्रण।
- खरपतवारनाशी का बहाव: पास के खेत से उड़कर आई दवा पत्तियों पर धब्बे या जलन कर सकती है। यह एक साथ कई पौधों पर, उसी खेत की तरफ़ वाले हिस्से में दिखता है, और इससे चिकने, पानी भीगे धब्बे नहीं बनते।
यह कैसे फैलता है और कब हमला करता है
जीवाणु बीज के रेशे और छिलके पर, और कटाई के बाद खेत में पड़ी पत्तियों और तनों में ज़िंदा रहते हैं। NIPHM के अनुसार यह रोग बीज से फैलता है। इसलिए खेत में रोग दो तरीकों से आ सकता है: जीवाणु वाले बीज से, या मिट्टी में पड़े कपास के पुराने अवशेषों से।
जब कुछ पौधे बीमार हो जाते हैं, तो फैलाव का ज़्यादातर काम बारिश करती है। बारिश की बूँदें और हवा के साथ आने वाली बारिश जीवाणुओं को एक धब्बे से दूसरे धब्बे और एक पौधे से दूसरे पौधे तक उछाल देती हैं। फव्वारा या बाढ़ सिंचाई का पानी, औज़ार, ट्रैक्टर और गीली फसल में चलते लोग भी इन्हें ले जा सकते हैं। जीवाणु पत्ती के छोटे साँस लेने वाले छिद्रों से और घावों से अंदर जाते हैं, जैसे हवा में उड़ती रेत से खरोंची हुई पत्ती।
कपास उगाने वालों की शोध संस्था Cotton Incorporated के अनुसार भारी बारिश के बाद जब गर्म, नम मौसम आता है और नमी 85% से ऊपर रहती है, तब रोग ज़्यादा बढ़ता और फैलता है। वह दिन का तापमान लगभग 32 से 38 °C और गर्म रातों को ख़तरे वाली स्थिति बताती है। बुवाई के तुरंत बाद की बारिश रोग की शुरुआत जल्दी करा सकती है। जब रोग पौध अवस्था में शुरू होता है, तो आगे सीज़न में नुकसान ज़्यादा होता है।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कपास ज़्यादातर खरीफ़ की फसल है, जो मानसून के साथ बोई जाती है। इसलिए छोटी फसल बारिश के महीनों में बढ़ती है, जो ख़तरे का समय है। पूरे भारत में NIPHM इसे सभी कपास क्षेत्रों का एक बड़ा रोग बताता है। उसके अनुसार जहाँ कपास सिंचाई से उगाई जाती है, वहाँ अक्सर 5 से 20% नुकसान देखा जाता है।
फसल की हर अवस्था में कपास का जीवाणु झुलसा रोग
यह कपास का रोग है, और बरसात के मौसम में हर कपास की फसल पर इसका ख़तरा रह सकता है। नुकसान कितना होगा, यह इस पर निर्भर करता है कि रोग किस अवस्था में शुरू हुआ।
पौध अवस्था: बीज पत्तों और कोमल तने पर धब्बे पौध को मार सकते हैं या खेत में खाली जगह छोड़ सकते हैं। जल्दी संक्रमण से रोग को शुरुआत भी मिल जाती है, और उसे फैलने के लिए पूरा सीज़न मिलता है।
बढ़वार अवस्था: कोणीय पत्ती धब्बे और नस झुलसा हरी पत्ती का क्षेत्र घटा देते हैं। ज़्यादा धब्बे होने पर पत्तियाँ जल्दी झड़ती हैं, जिससे पौधे के पास फूलों और टिंडों के लिए कम भोजन बचता है।
फूल और टिंडे की अवस्था: ब्लैक आर्म टिंडे वाली शाखाओं को कमज़ोर कर सकता है या तोड़ सकता है। टिंडे पर धब्बों से टिंडा सड़ता है, जल्दी गिरता है, ठीक से नहीं खुलता और रूई पर दाग लगते हैं, जिससे भाव कम मिलता है।
कब कदम उठाएँ
हमें कपास के जीवाणु झुलसा के लिए किसी मान्य सार्वजनिक स्रोत से आर्थिक देहली स्तर (रोग का वह स्तर जिसके बाद नियंत्रण पर खर्च करना फ़ायदेमंद होता है) नहीं मिला, इसलिए हम यहाँ कोई स्तर नहीं देते। NIPHM की सलाह है कि खेत में रोग पहली बार दिखते ही कदम उठाएँ।
पौध निकलने के समय से हफ़्ते में एक या दो बार खेत में घूमकर देखें, और भारी बारिश के बाद इससे भी ज़्यादा बार। पत्तियाँ पलटकर देखें कि कहीं नुकीले कोनों वाले छोटे, गीले दिखने वाले धब्बे तो नहीं। पत्ती की डंडियों और शाखाओं पर काली धारियाँ देखें, और छोटे टिंडों के निचले हिस्से पर चिकने धब्बे। यह भी नोट करें कि खेत के किस हिस्से में सबसे पहले दिखा।
कपास में जीवाणु झुलसा का रसायन के बिना नियंत्रण
- साफ़ बीज इस्तेमाल करें: भरोसेमंद डीलर से प्रमाणित बीज खरीदें। जिस बीज का रेशा एसिड से उतारा गया हो (एसिड डेलिंटेड, यानी कारखाने में रेशा हटाया हुआ), उसमें जीवाणु बहुत कम होते हैं। Cotton Incorporated के अनुसार एसिड डेलिंटिंग से इस रोग का नुकसान काफ़ी घटा है। जिस खेत में जीवाणु झुलसा आया हो, उसका बचाकर रखा बीज न बोएँ।
- प्रतिरोधी या सहनशील किस्में लगाएँ: Cotton Incorporated प्रतिरोधी किस्मों को नुकसान घटाने का सबसे सस्ता तरीका बताती है। अपने KVK (कृषि विज्ञान केंद्र), कृषि अधिकारी या बीज डीलर से पूछें कि आपके इलाके में बिकने वाले कौन से हाइब्रिड जीवाणु झुलसा को सहन करते हैं। जिन खेतों में पहले रोग आया था, वहाँ इन्हें लगाएँ।
- फसल अवशेष साफ़ करें: आख़िरी चुनाई के बाद, जिन खेतों में रोग था वहाँ कपास की डंडियाँ और गिरी पत्तियाँ निकालकर नष्ट कर दें, या गहरी जुताई करके मिट्टी में दबा दें ताकि वे सड़ जाएँ। दो सीज़न के बीच अपने आप उगे कपास के पौधे उखाड़ दें।
- फसल चक्र अपनाएँ: इस रोग वाले खेत में कपास के बाद कपास न लगाएँ। एक सीज़न कपास के अलावा कोई फसल, जैसे ज्वार, मक्का या दालें, लेने से पुराने अवशेषों को सड़ने का और जीवाणुओं को ख़त्म होने का समय मिलता है।
- फसल को घना न रखें: NIPHM घनी बुवाई से बचने की सलाह देता है। सिफ़ारिश की गई दूरी रखें ताकि बारिश के बाद पत्तियाँ जल्दी सूखें।
- पानी का इंतज़ाम करें: भारी बारिश के बाद खड़ा पानी निकाल दें। जहाँ हो सके, रोग वाली फसल में फव्वारा सिंचाई से बचें, क्योंकि छींटों से रोग फैलता है।
- गीली फसल में न जाएँ: पत्तियाँ गीली हों तब खेत में निराई, छिड़काव या आना-जाना न करें। बीमार खेत से स्वस्थ खेत में जाने से पहले औज़ार और ट्रैक्टर के टायर साफ़ करें।
रसायन से नियंत्रण: कोई छिड़काव जीवाणु झुलसा को ठीक नहीं करता
कोई भी छिड़काव उन पत्तियों, तनों या टिंडों को ठीक नहीं करता जिन पर धब्बे पड़ चुके हैं। जीवाणु झुलसा जीवाणु से होता है, फफूंद से नहीं, इसलिए ज़्यादातर फफूंदनाशी इस पर काम नहीं करते। छिड़काव ज़्यादा से ज़्यादा नई बढ़वार को बचा सकता है और स्वस्थ पौधों तक रोग का फैलाव धीमा कर सकता है।
हमारे स्टोर के किसी भी उत्पाद के लेबल पर कपास का जीवाणु झुलसा नहीं लिखा है, इसलिए हम यहाँ कोई उत्पाद नहीं सुझाते। अपने स्थानीय कृषि अधिकारी या KVK से आपकी फसल और इस रोग के लिए लेबल वाला उत्पाद पूछें। फिर सिर्फ़ वही उत्पाद, उसके लेबल पर छपी मात्रा और पानी की मात्रा के अनुसार इस्तेमाल करें।
अगर आप छिड़काव करें:
- एक बार में एक ही उत्पाद इस्तेमाल करें। एक टंकी में कई उत्पाद न मिलाएँ।
- लेबल पर छपे कटाई से पहले के प्रतीक्षा समय का पालन करें, जो आख़िरी छिड़काव से गिना जाता है।
- दस्ताने, मास्क, पूरी बाँह के कपड़े और जूते पहनें। छिड़काव सुबह या शाम की ठंडक में करें, हवा चलते समय या बारिश से ठीक पहले नहीं।
- जब मधुमक्खियाँ काम कर रही हों, तब फूलों पर छिड़काव न करें।
- इस्तेमाल से पहले लेबल और पर्चा पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कपास का जीवाणु झुलसा रोग क्या है?
यह कपास की पत्तियों, तनों और टिंडों का रोग है, जो जीवाणु Xanthomonas citri pv. malvacearum से होता है। इससे पत्तियों पर गहरे, कोणीय धब्बे, तनों और शाखाओं पर काली धारियाँ (ब्लैक आर्म) और टिंडों पर काले, धँसे धब्बे बनते हैं। इसे angular leaf spot (कोणीय पत्ती धब्बा) भी कहते हैं।
कपास में ब्लैक आर्म किस वजह से होता है?
ब्लैक आर्म जीवाणु झुलसा की बाद की अवस्था है। जीवाणु पत्ती से पत्ती की डंडी के रास्ते शाखाओं और तने में उतर जाते हैं और वहाँ लंबे काले निशान छोड़ते हैं। जिन शाखाओं पर निशान चारों ओर पूरा घूम जाए, वे टूट सकती हैं।
क्या फफूंदनाशी कपास का जीवाणु झुलसा ठीक कर देगी?
नहीं। यह जीवाणु का रोग है, इसलिए ज़्यादातर फफूंदनाशी इस पर असर नहीं करते, और कोई छिड़काव पहले से बने धब्बों को ठीक नहीं करता। साफ़ बीज, प्रतिरोधी किस्में, फसल चक्र और पुराने फसल अवशेष हटाना ही मुख्य नियंत्रण है। छिड़काव के लिए अपने कृषि अधिकारी या KVK से कपास पर इस रोग के लिए लेबल वाला उत्पाद पूछें।
क्या कपास का जीवाणु झुलसा बीज से आता है?
हाँ, आ सकता है। जीवाणु बीज और उसके रेशे पर और अंदर ज़िंदा रह सकते हैं, इसलिए संक्रमित बीज नए खेत में रोग शुरू कर सकता है। Cotton Incorporated के अनुसार सही मौसम मिलने पर 6,000 बीजों में से एक संक्रमित बीज भी प्रकोप शुरू कर सकता है। एसिड डेलिंटेड, प्रमाणित बीज बोएँ।
क्या यह धान के जीवाणु पत्ती झुलसा जैसा ही है?
नहीं। नाम मिलते-जुलते लगते हैं, पर धान का रोग दूसरे जीवाणु से होता है और कपास पर नहीं लगता। धान के लिए हमारी गाइड पढ़ें: धान का जीवाणु पत्ती झुलसा।
और पढ़ें
- अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा और झुलसा: लक्षण और नियंत्रण
- कपास का पत्ती मरोड़ रोग (लीफ कर्ल वायरस): लक्षण और फैलाव कैसे रोकें
- कपास में गुलाबी सुंडी: लक्षण, छिड़काव का समय और नियंत्रण
- कपास, भिंडी और बैंगन में हरा फुदका (जैसिड): पहचान और नियंत्रण
- धान का जीवाणु पत्ती झुलसा: लक्षण, फैलाव और नियंत्रण
- कपास के लिए उत्पाद
स्रोत
- National Institute of Plant Health Management (NIPHM), Directorate of Plant Protection, Quarantine and Storage, and National Centre for Integrated Pest Management, भारत सरकार: कपास के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन पैकेज
- Cotton Incorporated और अमेरिकी विश्वविद्यालयों के पादप रोग वैज्ञानिक: कपास के जीवाणु झुलसा की पहचान और प्रबंधन
- Showmaker and others, Standards in Genomic Sciences (2017): कपास के जीवाणु झुलसा रोगाणु Xanthomonas citri pv. malvacearum strain MSCT1 का जीनोम (फ़ोटो का स्रोत)
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