टमाटर, बैंगन और मिर्च में जीवाणु उकठा (बैक्टीरियल विल्ट): लक्षण, ऊज़ जाँच और नियंत्रण

· लेखक: AgriVruddhi

Tomato plant with bacterial wilt: whole branches and leaves hang down limp while the leaves are still green

ऊपर की फ़ोटो: टमाटर पर जीवाणु उकठा: पत्ते हरे होते हुए भी लटक गए हैं, फ़ोटो: Clemson University, USDA Cooperative Extension Slide Series, Public domain

सीधा जवाब

टमाटर में जीवाणु उकठा (बैक्टीरियल विल्ट) मिट्टी के जीवाणु Ralstonia solanacearum से होता है। यह बैंगन और मिर्च पर भी लगता है। पौधा अचानक लटक जाता है जबकि पत्ते अभी हरे होते हैं, फिर मर जाता है। तना काटकर साफ़ पानी में रखें: दूधिया धागे जैसा रिसाव निकले तो रोग पक्का है। कोई छिड़काव इसे ठीक नहीं करता। बीमार पौधे उखाड़ें, फसल चक्र अपनाएँ और स्वस्थ पौध लगाएँ।

टमाटर, बैंगन और मिर्च में जीवाणु उकठा की पहचान कैसे करें

हिंदी में बैक्टीरियल विल्ट को जीवाणु उकठा कहते हैं और तेलुगु में బాక్టీరియా వడలు తెగులు। यह तने के अंदर की पानी की नलियों का रोग है। जीवाणु इन नलियों को भर देते हैं, इसलिए जड़ों का पानी पत्तों तक नहीं पहुँच पाता। इसी वजह से मिट्टी गीली होने पर भी पौधा लटक जाता है।

  • हरे पौधे का अचानक मुरझाना: TNAU (तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय) इसे तेज़ और पूरा मुरझाना बताता है। पत्ते लटक जाते हैं, पर शुरू में अक्सर हरे ही रहते हैं।
  • दोपहर में लटकना, रात में ठीक दिखना: शुरू के दिनों में पौधा दोपहर की गर्मी में मुरझाता है और सुबह तक ठीक लगने लगता है। कुछ दिन बाद वह मुरझाया ही रहता है और मर जाता है।
  • निचली पत्तियाँ: बैंगन में निचली पत्तियाँ पहले लटक सकती हैं। टमाटर में पूरा पौधा मुरझाने से पहले कुछ निचली पत्तियाँ झड़ सकती हैं।
  • तने के अंदर भूरापन: मिट्टी के पास से तने को चीरें। अंदर का ऊतक भूरी धारियों वाला या भूरे गूदे वाला दिखता है।
  • सफ़ेद रिसाव: तने के कटे सिरे को दबाने पर उसमें से सफ़ेद, चिपचिपा तरल निकलता है।
खेत की कतार में टमाटर का एक पौधा पूरी तरह मुरझाकर सूख रहा है, उसके दोनों तरफ़ स्वस्थ हरे टमाटर के पौधे हैं
स्वस्थ कतार में टमाटर का एक अकेला मुरझाया पौधा, खेत में यह आम पहला संकेत है, फ़ोटो: Scot Nelson, CC0

जीवाणु उकठा की ऊज़ जाँच (पानी के गिलास की जाँच)

घर पर जीवाणु उकठा पक्का करने का यह सबसे आसान तरीका है। इसे NC State Extension ने बताया है।

  1. ऐसा पौधा चुनें जो अभी मुरझाना शुरू हुआ हो। जो पौधा पहले ही सूखकर मर चुका हो, उसका नतीजा कमज़ोर आता है।
  2. मिट्टी के ठीक ऊपर से तने का उँगली जितना लंबा टुकड़ा काटें।
  3. मिट्टी धो लें। टुकड़े को साफ़ पानी के पारदर्शी गिलास में लटकाएँ, कटा सिरा पानी में बस डूबा हो। उसे तली को छूने न दें।
  4. कुछ मिनट रुकें और बगल से देखें। कटे सिरे से नीचे बहते पतले, दूधिया सफ़ेद धागे जीवाणु उकठा के संकेत हैं।
पानी के गिलास में लटका मिर्च के पौधे का कटा तना, जिससे जीवाणु के रिसाव के पतले दूधिया सफ़ेद धागे नीचे बह रहे हैं
ऊज़ जाँच: कटे मिर्च के तने से जीवाणुओं के दूधिया धागे साफ़ पानी में बह रहे हैं, फ़ोटो: Scot Nelson, CC0 (cropped)
लंबाई में चीरा हुआ टमाटर का तना, जिसमें भूरा बदरंग ऊतक और अंदर खोखला भूरा गूदा दिख रहा है
चीरा हुआ टमाटर का तना: तने के अंदर भूरा ऊतक, फ़ोटो: Clemson University, USDA Cooperative Extension Slide Series, Bugwood.org, Public domain

जीवाणु उकठा बनाम फ्यूजेरियम उकठा और दूसरे मिलते-जुलते नुकसान

  • फ्यूजेरियम उकठा (फफूंद): यह धीमा होता है। पत्ते पहले पीले पड़ते हैं, अक्सर पौधे के एक तरफ़ या पत्ते के एक तरफ़, फिर मुरझाते हैं। तना अंदर से भूरा होता है, पर ऊज़ जाँच में दूधिया धागे नहीं दिखते। हमारी गाइड देखें: टमाटर और सब्ज़ियों में फ्यूजेरियम उकठा।
  • Southern blight (तना सड़न, फफूंद): पौधा इसमें भी मुरझाता है, पर तना मिट्टी की सतह पर सड़ता है। तने के आधार पर रूई जैसे सफ़ेद धागे उगते हैं, और उनके साथ सरसों के दाने जितने छोटे गोल भूरे पिंड होते हैं।
  • जड़ गांठ सूत्रकृमि (निमेटोड): पौधे दोपहर में लटकते हैं और छोटे रह जाते हैं, पर जड़ों में गाँठें (गाल) होती हैं। एक पौधा उखाड़कर देखें। देखें टमाटर, मिर्च और बैंगन में जड़ गांठ सूत्रकृमि।
  • आर्द्र गलन (डैम्पिंग ऑफ): यह पौधशाला में छोटी पौध को मार देता है। तना मिट्टी की सतह पर नरम और पतला हो जाता है और पौध गिर जाती है। देखें पौधशाला में पौध का आर्द्र गलन।
  • सिर्फ़ पानी की कमी: सिंचाई के बाद पौधा पूरी तरह ठीक हो जाता है। जीवाणु उकठा वाला पौधा गीली मिट्टी में भी मुरझाया रहता है।

जीवन चक्र और यह कब हमला करता है

जीवाणु मिट्टी में और संक्रमित पौधों के अवशेषों में रहते हैं। TNAU संक्रमित पौधों और मिट्टी को वे जगहें बताता है जहाँ यह ज़िंदा रहता है। NC State के अनुसार एक बार खेत में आ जाए, तो यह वहाँ लंबे समय तक रहता है। यह आलू, तंबाकू और कुछ खरपतवारों व फूलों समेत बहुत से दूसरे पौधों पर भी लगता है, जिससे यह दो फसलों के बीच भी बचा रहता है।

जीवाणु जड़ों से पौधे में घुसते हैं, ज़्यादातर छोटे घावों से। NC State कीटों, गुड़ाई-निराई और रोपाई से बने घावों का नाम लेता है। TNAU जोड़ता है कि जहाँ जड़ गांठ सूत्रकृमि होते हैं वहाँ रोग ज़्यादा होता है, क्योंकि सूत्रकृमि जड़ों को नुकसान पहुँचाते हैं।

यह इन तरीकों से फैलता है:

  • पौधशाला से खेत में लाई गई संक्रमित पौध।
  • औज़ारों, हलों, जूतों और टायरों में चिपकी मिट्टी।
  • बीमार हिस्से से बाकी खेत में बहता पानी।

गर्म मौसम और गीली मिट्टी इसके लिए अनुकूल हैं। TNAU ज़्यादा मिट्टी की नमी का नाम लेता है। NC State कहता है कि रोग ऊँचे तापमान, लगभग 29 °C से ऊपर, और नम मिट्टी में बढ़ता है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इस पर नज़र रखें जब गर्म दिन और गीली मिट्टी साथ मिलें: खरीफ़ में बारिश के दौरान, और भारी सिंचाई वाली गर्मी की फसलों में। जिन जगहों पर बारिश या सिंचाई के बाद पानी रुकता है, वहाँ ख़तरा ज़्यादा है।

यह किन फसलों पर हमला करता है

टमाटर में जीवाणु उकठा: रोपाई के बाद किसी भी अवस्था में पौधे मुरझा सकते हैं। मुरझाया पौधा ठीक नहीं होता, इसलिए हर बीमार पौधा पूरा नुकसान है।

बैंगन में जीवाणु उकठा: TNAU के अनुसार पत्तियाँ मुरझाती हैं, बढ़वार रुकती है और पत्ते पीले पड़ते हैं, फिर पूरा पौधा ढह जाता है। पौधे अक्सर दोपहर में मुरझाते हैं और रात में ठीक हो जाते हैं, कुछ दिन ऐसा चलता है और फिर मर जाते हैं।

मिर्च में जीवाणु उकठा: मिर्च और शिमला मिर्च भी इसके पोषक पौधे हैं। लक्षण वही हैं: हरे पौधे मुरझाते हैं, तने के अंदर भूरी धारियाँ दिखती हैं, और ऊज़ जाँच सकारात्मक आती है।

टमाटर, बैंगन और मिर्च, तीनों को यह रोग लगता है, इसलिए एक ही ज़मीन पर इन्हें एक के बाद एक उगाने से जीवाणु मिट्टी में ज़िंदा रहते हैं।

कब कदम उठाएँ

जीवाणु उकठा के लिए कोई आर्थिक देहली स्तर (कीट या रोग का वह स्तर जिसके बाद उपचार फ़ायदेमंद होता है) नहीं है। हमें किसी मान्य सार्वजनिक स्रोत से कोई स्तर नहीं मिला, इसलिए हम कोई स्तर नहीं देते। पहला मुरझाया पौधा दिखते ही कदम उठाएँ। ऊज़ जाँच करें। अगर नतीजा सकारात्मक हो, तो उसी दिन उस पौधे को हटाएँ और नीचे दिए कदम अपनाएँ। हर कुछ दिन खेत में घूमकर नए मुरझाए पौधे देखें, खासकर नीची, गीली जगहों पर।

रसायन के बिना जीवाणु उकठा का नियंत्रण

खेत में आ जाने के बाद जीवाणु उकठा को रोकना कठिन है। NC State Extension कहता है कि कोई रसायन असरदार नियंत्रण नहीं देता। इसलिए रोकथाम और खेत की सफ़ाई ही मुख्य औज़ार हैं।

रोपाई से पहले

  • फसल चक्र: TNAU फसल चक्र की सलाह देता है। टमाटर, बैंगन, मिर्च या आलू को एक ही ज़मीन पर एक के बाद एक न उगाएँ। बैंगन के लिए TNAU फूल गोभी जैसी गोभी कुल की फसलों के साथ चक्र बताता है। NC State मक्का, फलियाँ और पत्ता गोभी को ऐसी फसलें बताता है जिन पर यह रोग नहीं लगता।
  • स्वस्थ पौध: TNAU रोगमुक्त पौध की सलाह देता है। पौधशाला साफ़ मिट्टी पर बनाएँ जहाँ इन फसलों में पहले उकठा न आया हो। जिस पौधशाला में मुरझाए पौधे हों, वहाँ से पौध न खरीदें।
  • सहनशील किस्में: बैंगन के लिए TNAU किस्म Pant Samrat को सहनशील बताता है। टमाटर और मिर्च के लिए अपने KVK (कृषि विज्ञान केंद्र) या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से पूछें कि आपके इलाके में कौन सी स्थानीय किस्में या हाइब्रिड जीवाणु उकठा सहन करते हैं।
  • ग्राफ्टेड पौध: जिन खेतों में रोग आम है, वहाँ उकठा-रोधी मूलवृंत (पौधे का निचला हिस्सा, जिसमें जड़ें होती हैं) पर कलम किए गए टमाटर से NC State ने अच्छे नतीजे बताए हैं। अपने KVK से पूछें कि आपके इलाके में ग्राफ्टेड पौध मिलती है या नहीं।
  • नीम की खली: TNAU मिट्टी में प्रति एकड़ 100 kg नीम की खली डालने की सलाह देता है।
  • जल निकास: ऊँची क्यारियों या मेड़ों पर रोपाई करें ताकि तने के आसपास पानी न रुके।
  • जड़ गांठ सूत्रकृमि का नियंत्रण: TNAU के अनुसार सूत्रकृमि का नियंत्रण इस रोग को घटाने में मदद करता है।

खड़ी फसल में

  • बीमार पौधे तुरंत हटाएँ: हर मुरझाए पौधे को जड़ों और आसपास की मिट्टी समेत उखाड़ें। उसे थैले या बोरी में रखें ताकि रास्ते में मिट्टी न गिरे, और खेत से दूर नष्ट कर दें। उसे नहर में या मेड़ पर न फेंकें।
  • सिंचाई सोच-समझकर करें: TNAU सिंचाई सीमित रखने की सलाह देता है। फसल के लिए ज़रूरी पानी दें, पर खेत में पानी न भरें, और बीमार हिस्से से स्वस्थ कतारों की तरफ़ पानी न बहने दें।
  • औज़ार साफ़ रखें: बीमार हिस्से से साफ़ हिस्से में जाने से पहले औज़ारों, जूतों और टायरों से मिट्टी धो लें। पहले खेत के साफ़ हिस्से में काम करें।
  • जड़ों को चोट से बचाएँ: पौधों के पास गुड़ाई और निराई हल्के हाथ से करें, क्योंकि घावों से जीवाणु अंदर घुसते हैं।
  • ब्लीचिंग पाउडर से ड्रेंचिंग: TNAU अपनी टमाटर की योजना में ब्लीचिंग पाउडर से मिट्टी में ड्रेंचिंग बताता है। अपने KVK या कृषि अधिकारी से पूछें कि कितनी मात्रा लें और अपने खेत में इसे सुरक्षित तरीके से कैसे डालें।

रसायन से नियंत्रण

हमें अपने स्टोर के किसी भी उत्पाद के आधिकारिक लेबल पर टमाटर, बैंगन या मिर्च के लिए जीवाणु उकठा नहीं मिला, इसलिए हम यहाँ कोई उत्पाद नहीं सुझाते। ज़्यादातर फफूंदनाशी फफूंद पर काम करते हैं, जीवाणु पर नहीं, और कोई भी जीवाणु उकठा को ठीक नहीं करता। जो पौधा पहले ही मुरझा चुका है, उसे कोई छिड़काव नहीं बचा सकता, क्योंकि जीवाणु तने के अंदर हैं। अपने स्थानीय कृषि अधिकारी या KVK से अपनी फसल के लिए लेबल पर दर्ज उत्पाद पूछें, और उसे केवल लेबल के अनुसार इस्तेमाल करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

टमाटर में जीवाणु उकठा किस वजह से होता है?

मिट्टी के जीवाणु Ralstonia solanacearum से। पुरानी किताबें इसे Pseudomonas solanacearum कहती हैं। यह जड़ों से घुसता है और तने के अंदर की पानी की नलियों को बंद कर देता है।

मैं जीवाणु उकठा और फ्यूजेरियम उकठा में फ़र्क कैसे करूँ?

पानी के गिलास की जाँच करें। कटे तने से दूधिया धागे बहें तो जीवाणु उकठा है। फ्यूजेरियम उकठा में धागे नहीं निकलते, और उसमें पत्ते आमतौर पर मुरझाने से पहले पीले पड़ते हैं, अक्सर एक तरफ़ से। जीवाणु उकठा तेज़ होता है, और पौधा लटकते समय पत्ते अक्सर हरे ही होते हैं।

क्या फफूंदनाशी का छिड़काव जीवाणु उकठा ठीक कर सकता है?

नहीं। यह जीवाणु से होता है, फफूंद से नहीं, और जीवाणु तने के अंदर हैं। कोई छिड़काव मुरझाए पौधे को वापस नहीं ला सकता। पौधे को हटाएँ और बाकी खेत को बचाएँ।

क्या जिस खेत में जीवाणु उकठा आया था, उसमें दोबारा टमाटर उगा सकता हूँ?

तुरंत नहीं। जीवाणु मिट्टी में लंबे समय तक रहते हैं। अगले सीज़न में ऐसी फसलें उगाएँ जिन पर यह नहीं लगता, जैसे मक्का, फलियाँ या गोभी कुल की फसलें। टमाटर पर लौटते समय स्वस्थ पौध और, अगर मिले, तो प्रतिरोधी किस्म इस्तेमाल करें।

मेरे बैंगन के पौधे दोपहर में मुरझाते और रात में ठीक क्यों हो जाते हैं?

यह जीवाणु उकठा का आम शुरुआती संकेत है। दिन की गर्मी में बंद हुआ तना पर्याप्त पानी नहीं ले जा पाता। रात में पौधे को कम पानी चाहिए, इसलिए वह ठीक दिखता है। कुछ ही दिनों में वह मुरझाया ही रहता है। पक्का करने के लिए ऊज़ जाँच करें।

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स्रोत

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