मैंगनीज की कमी के लक्षण: धान, गेहूँ और गन्ने में पहचान और उपाय
· लेखक: AgriVruddhi

ऊपर की फ़ोटो: गुलाब की पत्ती पर मैंगनीज की कमी: नसों के बीच का हिस्सा हल्का पड़ गया है और नसों का जाल गहरा हरा है, Photo: Sten Porse, CC BY-SA 3.0
संक्षिप्त जवाब
पौधों में मैंगनीज की कमी सबसे पहले नई और बीच की पत्तियों पर दिखती है। पत्ती नसों के बीच से हल्की पड़ जाती है जबकि नसें हरी रहती हैं, और फिर सलेटी या भूरे चकत्ते पड़ते हैं। यह क्षारीय, रेतीली या ज़्यादा चूना डाली गई मिट्टी में सबसे आम है। मिट्टी या पत्ती की जाँच से पक्का करें, फिर सलाह के अनुसार मैंगनीज सल्फेट का छिड़काव करके कमी दूर करें।
पौधों में मैंगनीज की कमी के लक्षण
हिंदी में इस समस्या को मैंगनीज की कमी कहते हैं और तेलुगु में మాంగనీస్ లోపం। मैंगनीज एक सूक्ष्म पोषक तत्व है। यानी फसल को इसकी बहुत थोड़ी मात्रा चाहिए, पर इसके बिना वह ठीक से नहीं बढ़ सकती। पत्ती मैंगनीज का इस्तेमाल सूरज की रोशनी से भोजन बनाने में करती है। मैंगनीज कम पड़ने पर पत्ती का हरा रंग उड़ जाता है, वह कम भोजन बनाती है, और पौधा छोटा रह जाता है।
पत्ती की उम्र के हिसाब से मैंगनीज की कमी के लक्षण
मैंगनीज पौधे के अंदर आसानी से आगे नहीं जाता। एक बार पत्ती में पहुँच जाए, तो पौधा उसे नई पत्तियों को नहीं भेज सकता। इसलिए जब मिट्टी से पूरा नहीं मिलता, तो नई और बीच की पत्तियों में लक्षण पहले दिखते हैं, जबकि नीचे की पुरानी पत्तियाँ अक्सर हरी रहती हैं। मैग्नीशियम और नाइट्रोजन की कमी से इसे अलग पहचानने का यही मुख्य तरीका है, क्योंकि वे पुरानी पत्तियों से शुरू होती हैं।
- नसों के बीच हल्कापन: नसों के बीच की जगह हल्की हरी, पीली या सलेटी-हरी हो जाती है। नसें गहरी हरी रहती हैं, इसलिए पत्ती हल्के रंग के ऊपर हरे जाल जैसी दिखती है। धान, गेहूँ और गन्ने जैसी घास वाली फसलों में यह हरी रेखाओं के बीच हल्की धारियों जैसा दिखता है।
- चकत्ते और धब्बे: हल्के हिस्सों पर छोटे सलेटी, भूरे या मरे हुए धब्बे पड़ते हैं। गेहूँ में ये सलेटी चकत्ते होते हैं। धान में भूरे धब्बे फैलते हैं और पत्ती गहरी भूरी हो जाती है।
- छोटी नई पत्तियाँ: नई पत्तियाँ छोटी, संकरी और हल्की हरी निकलती हैं।
- छोटे पौधे: पौधे बौने और कमज़ोर रह जाते हैं।
- खेत में टुकड़े: लक्षण अक्सर वहाँ टुकड़ों में दिखते हैं जहाँ मिट्टी हल्की, ज़्यादा क्षारीय या हाल में चूना डाली हुई हो।
फ़ोटो में गुलाब की पत्ती इसलिए है कि खेत की फसलों में इस समस्या की साफ, मुफ़्त फ़ोटो कम मिलती हैं। बात धान, गेहूँ और गन्ने में वही है: हरी नसों के बीच हल्का हिस्सा, पहले नई और बीच की पत्तियों पर। इन संकरी पत्तियों पर जाल धारियों की तरह दिखता है।
धान में मैंगनीज की कमी
- IRRI राइस नॉलेज बैंक और TNAU एग्रीटेक पोर्टल, दोनों नई पत्तियों की नसों के बीच हल्का सलेटी-हरा रंग बताते हैं। यह पत्ती की नोक से आधार तक फैलता है।
- बाद में भूरे मरे हुए धब्बे बन जाते हैं और पत्ती गहरी भूरी हो जाती है।
- नई पत्तियाँ छोटी, संकरी और हल्की हरी निकलती हैं।
- पौधे छोटे होते हैं, पत्तियाँ कम होती हैं और जड़ें छोटी रहती हैं।
- IRRI के अनुसार मैंगनीज की कमी वाले पौधों को धान का भूरा धब्बा रोग होने की संभावना ज़्यादा होती है, और उनमें अक्सर फॉस्फोरस की भी कमी होती है।
पानी भरे धान में मैंगनीज की कमी आम नहीं है। खेत में पानी रहने से जड़ों के लिए मैंगनीज लेना आसान हो जाता है। यह ऊँची ज़मीन के धान और बिना खड़े पानी वाले धान में, और हल्की, रेतीली या क्षारीय मिट्टी में ज़्यादा दिखती है।
गेहूँ में मैंगनीज की कमी
- TNAU एग्रीटेक पोर्टल पत्तियों पर सलेटी चकत्ते और सामान्य से हल्की हरी पत्तियाँ बताता है।
- लक्षण आम तौर पर बीच और ऊपर की पत्तियों पर, टुकड़ों में दिखते हैं।
- उत्तर-पश्चिम भारत में यह समस्या हल्की, रेतीली मिट्टी में जानी-पहचानी है, जहाँ धान के बाद गेहूँ बोया जाता है। धान के मौसम में लंबे समय तक पानी भरा रहने से मैंगनीज नीचे चला जाता है, छोटे गेहूँ की जड़ों की पहुँच से बाहर।
गन्ने में मैंगनीज की कमी
- TNAU एग्रीटेक पोर्टल के अनुसार नई पत्तियाँ पहले नसों के बीच से हल्की पड़ती हैं। हल्का रंग तब तक बढ़ता है जब तक पूरी पत्ती बराबर पीली न हो जाए।
- पत्ती की ऊपरी सतह पर सलेटी, धातु जैसी, बैंगनी-सी चमक आ सकती है।
- पत्ती के किनारे ऊपर की ओर मुड़ सकते हैं।
- क्षारीय या चूनेदार मिट्टी (जिनमें मुक्त चूना होता है, और एसिड डालने पर झाग उठता है) वाले खेतों में खतरा ज़्यादा है।
मिलती-जुलती समस्याएँ और फर्क कैसे पहचानें
- आयरन (लोहा) की कमी: यह भी नई पत्तियों में हरी नसों के बीच हल्कापन लाती है, और क्षारीय मिट्टी में भी आम है। आयरन की कमी में नई पत्तियाँ अक्सर लगभग सफेद हो जाती हैं, चकत्ते कम होते हैं। मैंगनीज में रंग ज़्यादा सलेटी होता है और चकत्ते पड़ते हैं। दोनों साथ भी हो सकती हैं। देखें पौधों में आयरन (लोहा) की कमी और उसका सुधार।
- जिंक की कमी: धान में नई पत्तियों का आधार हल्का पड़ता है और पुरानी पत्तियों पर जंग जैसे भूरे धब्बे पड़ते हैं, अक्सर रोपाई के 2–4 हफ्ते बाद। देखें धान में जिंक की कमी और खैरा रोग।
- मैग्नीशियम की कमी: नसों के बीच हल्कापन यहाँ भी होता है, पर पहले पुरानी, नीचे की पत्तियों पर। देखें मैग्नीशियम की कमी के लक्षण।
- गंधक (सल्फर) की कमी: नई पत्तियाँ नसों समेत बराबर हल्की पीली हो जाती हैं, हरा जाल नहीं दिखता। देखें फसलों में गंधक की कमी।
- पत्ती धब्बा रोग: फफूँद के धब्बों का किनारा या घेरा आम तौर पर साफ होता है और ये गीले मौसम में फैलते हैं। पोषक तत्व की कमी के चकत्ते हल्के, जाल जैसे हिस्से के अंदर होते हैं।
लक्षण मिल-जुल सकते हैं और भ्रम पैदा कर सकते हैं। मिट्टी की जाँच, और जहाँ आपकी लैब करती हो वहाँ पत्ती की जाँच, पक्का पता लगाने का सही तरीका है।
पौधों में मैंगनीज की कमी के कारण: मिट्टी से जुड़े कारण
कभी-कभी मिट्टी में सच में मैंगनीज कम होता है। ज़्यादातर बार मैंगनीज मौजूद होता है, पर ऐसे रूप में कि जड़ें उसे ले नहीं सकतीं। खतरा तब ज़्यादा है जब:
- मिट्टी क्षारीय (ऊँचा pH) या चूनेदार हो: मैंगनीज बँध जाता है और जड़ें उसे सोख नहीं पातीं
- मिट्टी हल्की और रेतीली हो, और मैंगनीज धुलकर जड़ क्षेत्र से नीचे चला गया हो
- बड़ी मात्रा में चूना डाला गया हो, जिससे pH बढ़ता है
- मिट्टी बहुत लंबे समय तक बहुत सूखी और हवादार रहे, जिससे मैंगनीज ऐसे रूप में बदल जाता है जिसे जड़ें इस्तेमाल नहीं कर सकतीं
- मिट्टी में जैविक पदार्थ कम हो, या खेत से कई मौसम तक खूब फसल ली गई हो और खाद वापस न डाली गई हो
- हल्की मिट्टी में धान के बाद गेहूँ बोया जाए, जैसा ऊपर बताया गया
- ठंड, सूखे या चोट से जड़ें कमज़ोर हों, इसलिए वे कम लें
पानी भरने से उलटा असर होता है। खड़े पानी में मैंगनीज ऐसे रूप में बदल जाता है जिसे जड़ें आसानी से ले लेती हैं। इसीलिए पानी भरे धान में कमी कम होती है, और इसीलिए वही खेत अगली सूखी फसल में लक्षण दिखा सकता है।
यह कब दिखती है
मैंगनीज की कमी मिट्टी की समस्या है, इसलिए यह उन्हीं खेतों के उन्हीं टुकड़ों में बार-बार लौटती है। एक मौसम के भीतर यह शुरुआती बढ़वार की अवस्थाओं में सबसे ज़्यादा दिखती है, जब जड़ें अभी छोटी होती हैं और पौधा बहुत नई पत्तियाँ बना रहा होता है। ठंडे, सूखे दिनों में लक्षण कुछ समय के लिए आ सकते हैं, और मौसम गर्म होने और जड़ें बढ़ने पर घट सकते हैं।
खड़ी फसल में लक्षण दिखें तो क्या करें
- पत्ती की उम्र देखें। हल्कापन नई या बीच की पत्तियों पर है (मैंगनीज, आयरन, जिंक, गंधक) या पुरानी पत्तियों पर (मैग्नीशियम, नाइट्रोजन, पोटैशियम)?
- कीट, माइट और रोग के धब्बे ध्यान से देखें, ताकि किसी कीट या रोग को पोषक तत्व की समस्या समझकर इलाज न करें।
- लक्षण वाले टुकड़े और स्वस्थ टुकड़े की तुलना करें। दोनों में मिट्टी का प्रकार और हाल में चूना डाला गया या नहीं, यह लिख लें।
- पौधे अपने स्थानीय कृषि अधिकारी या KVK (कृषि विज्ञान केंद्र, ज़िले का खेती विज्ञान केंद्र) को दिखाएँ। पत्ती की जाँच के बारे में पूछें।
- टुकड़ों पर निशान लगाएँ और अगले मौसम से पहले उस मिट्टी की जाँच कराएँ।
मिट्टी या पत्ती की जाँच से पक्का करें
मौसम से पहले मिट्टी का नमूना लेकर अपनी नज़दीकी मिट्टी जाँच लैब या KVK को भेजें। मानक सॉइल हेल्थ कार्ड में 12 चीज़ें बताई जाती हैं, और मैंगनीज उनमें से एक है। बाकी हैं नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम, गंधक, जिंक, आयरन, तांबा, बोरॉन, pH, लवण स्तर (EC) और जैविक कार्बन। इसलिए सामान्य कार्ड की जाँच बताती है कि मैंगनीज कम है या नहीं, और उसी कार्ड का pH बताता है कि क्षारीय मिट्टी संभावित कारण है या नहीं।
खड़ी फसल में, पत्ती की जाँच अगली मिट्टी जाँच का इंतज़ार करने से जल्दी कमी की पुष्टि कर सकती है। अपने KVK या राज्य कृषि विश्वविद्यालय की लैब से पूछें कि क्या यह सुविधा देते हैं।
रोकथाम: मिट्टी को मज़बूत बनाएँ
- जैविक पदार्थ: IRRI राइस नॉलेज बैंक सलाह देता है कि जिन मिट्टियों में मैंगनीज और जैविक पदार्थ कम हो, उनमें गोबर की खाद या फसल का भूसा डालें। कम्पोस्ट और हरी खाद भी जड़ों की मदद करती हैं और पोषक तत्वों को जड़ क्षेत्र में रोके रखती हैं।
- फसल अवशेष: जहाँ हो सके, डंठल और भूसे को जलाने के बजाय जुताई करके वापस मिट्टी में मिला दें।
- क्षारीय मिट्टी में खाद का चुनाव: IRRI यह भी सुझाता है कि यूरिया की जगह अमोनियम सल्फेट जैसी अम्ल बनाने वाली नाइट्रोजन खाद इस्तेमाल करें। इससे जड़ों के पास pH थोड़ा घटता है। खाद की योजना बदलने से पहले अपने कृषि अधिकारी से पूछ लें।
- चूना: जब तक मिट्टी की जाँच में मिट्टी अम्लीय न निकले, चूना न डालें। बहुत ज़्यादा चूना मैंगनीज की कमी का आम कारण है।
- संतुलित खाद: नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश मिट्टी की जाँच के अनुसार दें, ताकि फसल की जड़ें मज़बूत हों और जो मैंगनीज मौजूद है उसे ढूँढ सकें।
मैंगनीज की कमी दूर करना: मिट्टी में डालें या छिड़कें?
आम स्रोत मैंगनीज सल्फेट है। इन फसलों के सार्वजनिक गाइड मुख्य रूप से पत्तियों पर छिड़काव की सलाह देते हैं, जो मैंगनीज सीधे पत्तियों पर पहुँचाता है। क्षारीय मिट्टी में मिट्टी में डाला गया मैंगनीज जल्दी फिर से बँध सकता है, इसलिए छिड़काव अक्सर तेज़ उपाय है। छिड़काव से मिट्टी नहीं बदलती, इसलिए एक से ज़्यादा छिड़काव लग सकते हैं, और समस्या अगले मौसम में फिर आ सकती है।
TNAU एग्रीटेक पोर्टल (तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय) ये आम मात्राएँ देता है। ये मार्गदर्शन हैं, पक्का नियम नहीं: आपके खेत की मात्रा आपकी मिट्टी जाँच रिपोर्ट और आपके स्थानीय कृषि अधिकारी को तय करनी चाहिए।
- धान: 0.2% मैंगनीज सल्फेट का छिड़काव करें, यानी प्रति लीटर पानी में 2 g, दो बार, 15 दिन के अंतर पर।
- गेहूँ: 0.2% मैंगनीज सल्फेट का छिड़काव करें, यानी प्रति लीटर पानी में 2 g।
- गन्ना: मैंगनीज सल्फेट 1–2% का छिड़काव करें, यानी प्रति लीटर पानी में 10–20 g।
ठंडी सुबह या शाम को छिड़कें। नया छिड़काव पहले कुछ पौधों पर आज़माएँ और दो दिन बाद उन्हें जाँचें, क्योंकि तेज़ धूप में तेज़ घोल पत्तियाँ झुलसा सकता है।
फिलहाल हमारे स्टोर में ऐसा कोई उत्पाद नहीं है जिसके आधिकारिक लेबल पर मैंगनीज की कमी लिखी हो। अपनी फसल के लिए लेबल वाले और अपनी मिट्टी के अनुकूल मैंगनीज उत्पाद के लिए अपने स्थानीय कृषि अधिकारी या KVK से पूछें। फसल के सामान्य पोषण के लिए आप हमारे उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्व देख सकते हैं।
सुरक्षा
- उर्वरक और मिट्टी सुधारक तौलकर डालें। हाथ या अंदाज़े से न नापें।
- ज़्यादा मैंगनीज बेहतर नहीं है। बहुत ज़्यादा होने पर फसल को नुकसान हो सकता है, खासकर अम्लीय या जलभराव वाली मिट्टी में, जहाँ मैंगनीज जड़ों के लिए पहले से आसानी से उपलब्ध होता है।
- सलाह दी गई मात्रा से तेज़ छिड़काव न करें। तेज़ छिड़काव पत्तियाँ जला सकता है।
- उर्वरक के पाउडर और छिड़काव को संभालते समय दस्ताने और मास्क पहनें। बाद में हाथ धोएँ।
- उर्वरकों को खाने, चारे और बच्चों से दूर रखें।
- इस्तेमाल से पहले लेबल और पर्चा पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पौधों में मैंगनीज की कमी के लक्षण क्या हैं?
नई और बीच की पत्तियाँ नसों के बीच से हल्की पड़ती हैं जबकि नसें हरी रहती हैं। फिर हल्के हिस्सों पर सलेटी या भूरे चकत्ते दिखते हैं। नई पत्तियाँ छोटी होती हैं और पौधा बौना रहता है। नीचे की पुरानी पत्तियाँ आम तौर पर हरी रहती हैं।
मैंगनीज की कमी आयरन (लोहा) की कमी से कैसे अलग है?
दोनों नई पत्तियों से शुरू होती हैं और दोनों क्षारीय मिट्टी में आम हैं। आयरन की कमी में नई पत्तियाँ लगभग सफेद हो जाती हैं, चकत्ते कम होते हैं। मैंगनीज की कमी ज़्यादा सलेटी दिखती है और चकत्ते या मरे हुए धब्बे लाती है। मिट्टी या पत्ती की जाँच पक्का फर्क बता देती है।
धान के बाद गेहूँ की पत्तियों पर सलेटी चकत्ते क्यों पड़ते हैं?
हल्की, रेतीली मिट्टी में धान के मौसम में लंबे समय तक पानी भरा रहने से मैंगनीज छोटे गेहूँ की जड़ों के नीचे चला जा सकता है। तब गेहूँ में सलेटी चकत्ते और हल्की पत्तियाँ दिखती हैं। मिट्टी की जाँच कराएँ और मैंगनीज सल्फेट के छिड़काव के बारे में अपने KVK से पूछें।
क्या सॉइल हेल्थ कार्ड में मैंगनीज दिखता है?
हाँ। मानक कार्ड की 12 चीज़ों में मैंगनीज एक है। मैंगनीज का नतीजा और pH साथ-साथ देखें।
मैंगनीज छिड़कना चाहिए या मिट्टी में डालना चाहिए?
धान, गेहूँ और गन्ने के लिए TNAU के गाइड मैंगनीज सल्फेट का पत्तियों पर छिड़काव सुझाते हैं। छिड़काव तेज़ काम करता है, खासकर क्षारीय मिट्टी में जहाँ मिट्टी का मैंगनीज बँध जाता है। योजना बनाने के लिए अपनी मिट्टी की जाँच और कृषि अधिकारी की सलाह का इस्तेमाल करें।
और पढ़ें
- पौधों में जिंक की कमी: धान में खैरा रोग और दूसरी फसलों में लक्षण
- पौधों में आयरन (लोहा) की कमी: नई पीली पत्तियाँ और हरी नसें
- पौधों में मैग्नीशियम की कमी: पुरानी पीली पत्तियाँ
- धान का भूरा धब्बा रोग: लक्षण और नियंत्रण
- उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्व और धान के उत्पाद
स्रोत
- IRRI Rice Knowledge Bank, International Rice Research Institute: धान में मैंगनीज की कमी
- TNAU Agritech Portal, Tamil Nadu Agricultural University: धान में मैंगनीज की कमी
- TNAU Agritech Portal: गेहूँ में मैंगनीज की कमी
- TNAU Agritech Portal: गन्ने में मैंगनीज की कमी
- Vikaspedia (Government of India): सॉइल हेल्थ कार्ड, जाँचे जाने वाले 12 मानक
- Department of Agriculture and Farmers Welfare: सॉइल हेल्थ कार्ड पोर्टल
खेती की ये जानकारी पसंद आई? Google पर AgriVruddhi को पसंदीदा स्रोत चुनें
फ़सल स्वास्थ्य गाइड पर वापस जाएँ